देश की राजधानी दिल्ली ही नहीं देश के दूसरे शहरों पर भी पड़ रही जहरीली हवा की मार

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण ख़तरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद जहां इस पर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है और दिल्ली सरकार इससे निपटने के लिए ऑड-ईवन लागू करने की दलीलें दे रही है। तो वहीं दूसरी तरफ जहरीली हवा की मार झेलनेवाली एक मात्र देश की राजधानी दिल्ली ही नहीं बल्कि कई दूसरे शहरों में भी इसके असर से लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

दिल्ली में जहरीली हवा की मार

राजधानी दिल्ली में पिछले चार दिनों से ऐसी हालत हो चुकी है डॉक्टर ने सख्त हिदायत दी कि लोग सुबह के समय अपने घरों से टहलने के लिए नहीं निकले। इसके साथ ही, दिल्ली सरकार ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए सभी स्कूलों को रविवार तक बंद करने के आदेश दे दिए। इसके साथ ही राजधानी में कंस्ट्रक्शन वर्क पर रोक लगाने समेत कई तरह के निर्देश दिए गए हैं। उसके बावजूद राजधानीवासियों को प्रदूषण की मार से बचने के फिलहाल कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल है उत्तर प्रदेश का।

कोहरे व धुंध से यूपी की हालत भी खराब

उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में कोहरे व धुंध के चलते शुक्रवार को भी एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) चिंताजनक स्तर यानी 401-500 के बीच दर्ज किया गया। वाराणसी में एक्यूआइ सर्वाधिक 491 दर्ज हुआ। वहीं लखनऊ में एक्यूआइ का स्तर 462 व कानपुर में 461 रिकार्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार रविवार से स्थिति सुधरने की उम्मीद है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी एक्यूआइ बुलेटिन के अनुसार दिल्ली में शुक्रवार को एक्यूआइ 468 था। यानी लखनऊ में 462 का प्रदूषण स्तर दिल्ली के मुकाबले बस थोड़ा सा ही कम रहा। यह बात दीगर है कि लखनऊ में इसे लेकर महकमों में बेफिक्री ही नजर आई। वहीं वाराणसी ने तो दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया। यहां एक्यूआइ दिल्ली से कहीं अधिक 491 व गाजियाबाद में 485 रिकार्ड हुआ।

इलाहाबाद में स्मॉग ने लिया भयावह रुप

इलाहाबाद में दिल्ली से आया स्मॉग धीरे-धीरे भयावह रूप ले रहा है। शहर की हवा डेढ़ गुना जहरीली हो गई है। स्मॉग अब ग्रामीण क्षेत्र में पांव पसार रहा है। स्मॉग का असर बढ़ने पर सांस से संबंधी मरीजों की तकलीफ बढ़ गई है। दिल्ली का स्मॉग इलाहाबाद आने पर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। दिन में स्मॉग परेशान कर रहा है। रात में कोहरा लोगों की परेशानी का सबब बन गया है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक प्रदूषण का मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। लेकिन यह 250 माइक्रोग्राम पहुंच गया है, जो परेशानी का सबब है।

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