जिंदगी जीने के कुछ खास नियम

जिंदगी जीने के लिए जरुरी है, आप की सकारात्मक सोच अगर आप की सोच सकारात्मक है तो आप अपने जीवन मे सभी मुसीबतों से आगे निकल जायेगे। और आप अपनी जिंदगी के हर पहलू और हर पल को खेल-खेल में जी सकते हैं।

आस्था

अध्यात्म (Spirituality) बेशक विज्ञान से थोड़ा हटके है लेकिन बुद्धिजीवी बनने के चक्कर में लोग अक्सर आत्मिक शक्ति (Spiritual Strength) और सुपर नेचुरल पॉवर (Supernatural power) को महसूस करते हुए भी नकार देते है लेकिन किसी चीज़ में आपकी आस्था (faith) आपके लिए सकारात्मक प्रभाव देती है इसलिए अगर संभव हो और आपको मन में किसी चीज़ के लिए आस्था (faith) हो तो बनाये रखे क्योंकि एकदम सिरे से नकार कर हो सकता है आप अपना ही नुकसान कर रहे हो।

परिवार से जुड़ाव

एक फिलोसोफी है कि जिन्दगी सही मायने में सच्चा अर्थ देने के लिए जरुरी है कि आपके लिए परिवार (family) पहले आना चाहिए और पैसे और काम बाद में क्योंकि काम के बाद आप घर में ही आते है और अगर आपके परिवार (family) के साथ आपका आत्मिक जुड़ाव अच्छा है तो आपका परिवार ही आपके लिए ख़ुशी और उर्जा का नया स्त्रोत बन जाता है खासकर परिवार के बच्चे (children) आपके लिए उर्जा (energy) का एक नया जरिया (source) होते है और आपको बहुत ख़ुशी (happiness) देते है इसलिए बच्चो के साथ मन से जुड़े ।

सकारात्मक विचार

प्रकृति की सबसे अद्भुत देन है ‘दिमाग’… यदि यह ना होता तो आज हम कहां होते?
मस्तिष्क की इतनी आश्चर्यजनक शक्ति के बावजूद ज्यादातर लोग इस पर नियंत्रण करने की कोशिश ही नहीं करते हैं यही वजह हैं कि वे डरों और मुश्किलों से भयभीत होकर जीवन जीते हैं, उचित दृष्टिकोण, और सकारात्मक सोच के साथ सही दिशा में कार्य करने वाले व्यक्ति अपने जीवन में सफलता के नयें आयाम स्थापित करते हैं।

आप का हंसमुख अंदाज़

आप का हंसमुख अंदाज़ केवल आपका ही है, अन्य किसी की ऐसी खासियत शायद ही हो। तो फिर उदासी में हम अपनी इन ताकतों को कैसे भूल जाते हैं। भगवान बुद्ध सही कहते थे – ‘हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही हो जाते हैं । इसलिए यदि आप हताश ना होकर अपनी अंदरूनी ताकतों का इस्तेमाल करें तो शायद आप सारे ग़म भुला सकते हैं।

परेशान ना हों

बस ज़िंदगी ने कहीं दुख दिए नहीं कि उससे लड़ने से पहले ही हार को दर्शाते हुए हाथ खड़े कर दिए। बड़े-बुज़ुर्गों ने सही तो कहा है कि ज़िंदगी हमें अपने हर एक पड़ाव पर एक सीख दे जाती है, मज़ा तो तब है जब हम उस सीख को सकारात्मक व्यवहार से अपनाते हुए अगले पड़ाव की ओर बढ़ चलें।

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